Jharkhand High Court: झारखंड हाईकोर्ट से मोदी परिवार को राहत, अपर बाजार की दुकानों की लीज रद्द करने का आदेश निरस्त

Jharkhand High Court: झारखंड हाईकोर्ट ने रांची के अपर बाजार स्थित जालान रोड की जमीन और दुकानों की लीज रद्द करने के रांची नगर निगम के फैसले को अवैध करार दिया है. जस्टिस संजय कुमार द्विवेदी की अदालत ने किरण देवी मोदी समेत आठ याचिकाकर्ताओं की रिट याचिकाएं मंजूर कर

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Jharkhand High Court: झारखंड हाईकोर्ट से मोदी परिवार को राहत, अपर बाजार की दुकानों की लीज रद्द करने का आदेश निरस्त
झारखंड हाईकोर्ट

Jharkhand High Court: झारखंड हाईकोर्ट ने रांची के अपर बाजार स्थित जालान रोड की जमीन और दुकानों की लीज रद्द करने के रांची नगर निगम के फैसले को अवैध करार दिया है. जस्टिस संजय कुमार द्विवेदी की अदालत ने किरण देवी मोदी समेत आठ याचिकाकर्ताओं की रिट याचिकाएं मंजूर कर ली हैं. अदालत ने कहा कि निगम के फैसलों के पीछे कोई ठोस आधार नहीं था. इस फैसले से सभी याचिकाकर्ताओं को राहत मिली है.

1966 में टेंट हाउस के लिए मिली थी जमीन

यह मामला करीब छह दशक पुराना है. वर्ष 1966-67 में तत्कालीन नगरपालिका ने मोहन लाल कतची को टेंट हाउस का कारोबार चलाने के लिए जमीन आवंटित की थी. बाद में कानूनी प्रक्रियाओं के जरिए यह संपत्ति मोदी परिवार के पास पहुंची. वर्ष 2004 में नगर निगम की अनुमति से यहां पक्के निर्माण भी किए गए. इसके बाद दुकानों को दूसरे याचिकाकर्ताओं के नाम आवंटित करने का अनुरोध किया गया था.

2014 में निगम ने रद्द कर दी थी लीज

वर्ष 2014 में रांची नगर निगम ने कारण बताओ नोटिस जारी किया. इसके बाद जमीन की लीज रद्द कर दी गई और दुकानें खाली करने का आदेश दिया गया. निगम ने लीज की शर्तों के उल्लंघन और सब-लेटिंग यानी किराये पर आगे दुकान देने को कार्रवाई का आधार बताया था. इस फैसले को चुनौती देते हुए किरण देवी मोदी समेत आठ याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था.

हाईकोर्ट ने निगम के आदेश किए रद्द

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पाया कि नगर निगम के आदेश महज तीन पंक्तियों में जारी किए गए थे. अदालत के अनुसार, इन आदेशों में प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का ध्यान नहीं रखा गया था. कोर्ट ने निगम के सभी संबंधित आदेश रद्द कर दिए हैं. साथ ही निर्देश दिया है कि 12 सप्ताह के भीतर मामले के सभी पक्षों की दलीलों और दस्तावेजों पर विचार किया जाए. इसके बाद नगर निगम को नया और तर्कसंगत आदेश जारी करना होगा.

12 सप्ताह तक कब्जे पर नहीं होगा असर



हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि नए आदेश की प्रक्रिया पूरी होने तक याचिकाकर्ताओं के कब्जे पर कोई असर नहीं पड़ेगा. इससे फिलहाल मोदी परिवार समेत सभी याचिकाकर्ताओं को राहत मिली है.

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