Chatra Land Registry Fraud: चतरा जिले में जमीन की रजिस्ट्री से जुड़ा कथित फर्जीवाड़ा सामने आया है. आरोप है कि फर्जी होल्डिंग, वंशावली और पावर ऑफ अटॉर्नी के सहारे एक ही दिन में सात जमीनों की रजिस्ट्री करा दी गई. मामला सामने आने के बाद जिला निबंधन कार्यालय की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं. सब रजिस्ट्रार संतोष रजक और कंप्यूटर ऑपरेटर विकास के अलग-अलग बयानों से भी विवाद बढ़ गया है.
दस्तावेजों की जांच को लेकर अलग-अलग दावे
सब रजिस्ट्रार संतोष रजक का कहना है कि रजिस्ट्री से पहले दस्तावेजों की जांच कंप्यूटर ऑपरेटर करता है. वहीं, ऑपरेटर विकास का दावा है कि उसने ऑनलाइन उपलब्ध खतियान और पंजी टू के आधार पर दस्तावेजों का सत्यापन किया था. उसके मुताबिक, दस्तावेजों की अंतिम जांच की जिम्मेदारी प्रधान सहायक और सब रजिस्ट्रार की होती है. दोनों के बयानों के बाद निबंधन कार्यालय में दस्तावेजों की जांच की प्रक्रिया पर सवाल उठने लगे हैं.
शिकायतकर्ताओं ने रजिस्ट्री रद्द करने की मांग की
शिकायतकर्ता राहुल देव और नीरज सिन्हा ने इस मामले में अंचल अधिकारी से लेकर मुख्यमंत्री तक आवेदन दिया है. उन्होंने कथित फर्जी दस्तावेजों के आधार पर हुई रजिस्ट्री रद्द करने और म्यूटेशन के आवेदनों को निरस्त करने की मांग की है. शिकायत में आरोप लगाया गया है कि एक ही होल्डिंग रसीद संख्या का इस्तेमाल अलग-अलग नाम और होल्डिंग नंबर दर्ज करने में किया गया. आरोप है कि दस्तावेजों में इसी तरह बदलाव कर जमीन की रजिस्ट्री कराई गई.
अपर समाहर्ता ने दस्तावेजों पर उठाए सवाल
मामले पर अपर समाहर्ता अरविंद कुमार ने कहा कि पहली नजर में रजिस्ट्री के लिए पेश किए गए दस्तावेज फर्जी लग रहे हैं. उन्होंने वंशावली जारी करने के अधिकार और निबंधन कार्यालय की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं. इससे मामले की गंभीरता और बढ़ गई है.
उपायुक्त ने बनाई जांच कमेटी
उपायुक्त रवि आनंद ने पूरे मामले की जांच के लिए कमेटी गठित करने का निर्देश दिया है. प्रशासन यह भी पता लगाएगा कि जमीन खरीदने वालों ने बिक्री की रकम नियमानुसार विक्रेताओं के बैंक खातों में भेजी थी या नहीं. जांच में यदि फर्जी दस्तावेजों या दूसरी गड़बड़ियों की पुष्टि होती है, तो संबंधित लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी.


