JPSC Paper Leak: 14वीं झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) परीक्षा में कथित धांधली और रिश्वतखोरी के मामले में CID ने एक और बड़ी कार्रवाई की है. जांच एजेंसी ने विशेष अदालत में दूसरी पूरक चार्जशीट दाखिल कर दी है. इस चार्जशीट में बुद्धेश्वर भगत और रमेश कुमार समेत 10 आरोपियों के नाम शामिल हैं. इन सभी को पिछले साल अगस्त में गिरफ्तार किया गया था. जांच एजेंसी के मुताबिक, अब तक इस मामले में कुल 34 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है. इससे पहले तत्कालीन आयोग अध्यक्ष एल. ख्यांग्ते समेत 12 अन्य लोगों के खिलाफ भी चार्जशीट दाखिल की गई थी.
डिजिटल और वित्तीय लेनदेन के साक्ष्य मिले
CID की जांच में आरोपियों के खिलाफ डिजिटल साक्ष्य, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) और वित्तीय लेनदेन से जुड़े सबूत जुटाए गए हैं. एजेंसी का दावा है कि इन साक्ष्यों से परीक्षा में गड़बड़ी और अवैध वसूली के नेटवर्क की जानकारी मिली है. जांच में सामने आए आरोपों के मुताबिक, इस पूरे मामले में अभ्यर्थियों को परीक्षा में पास कराने का भरोसा देकर उनसे मोटी रकम वसूली गई. इसके लिए बिचौलियों और दूसरे लोगों का नेटवर्क काम कर रहा था.
बुद्धेश्वर भगत पर करोड़ों की डील का आरोप
चार्जशीट में शामिल बुद्धेश्वर भगत को कंप्यूटर ऑपरेटर और बिचौलिया बताया गया है. जांच एजेंसी के आरोपों के अनुसार, वह मुख्य आरोपियों के करीबी संपर्क में था. उस पर अभ्यर्थियों को पास कराने के नाम पर करोड़ों रुपये की डील करने का आरोप है. साथ ही मूल दस्तावेज और नकदी को सिंडिकेट तक पहुंचाने में भूमिका निभाने की बात भी सामने आई है. रमेश कुमार पर अभ्यर्थियों को अनुचित लाभ दिलाने, ओएमआर शीट में हेरफेर और अवैध वसूली में शामिल होने का आरोप है. जांच में उसके वित्तीय लेनदेन की भूमिका भी सामने आने का दावा किया गया है.
दस्तावेज और पैसे के प्रबंधन का आरोप
उमेश कुमार पर घोटाले से जुड़े पैसों और गोपनीय दस्तावेजों का प्रबंधन करने का आरोप है. जांच एजेंसी के अनुसार, गिरफ्तारी की आशंका के बीच साक्ष्य मिटाने और दस्तावेज वापस करने की साजिश में भी उसकी भूमिका थी. उमाकांत उरांव का नाम भी चार्जशीट में शामिल है. वह 14वीं JPSC परीक्षा में सफल अभ्यर्थी बताया गया है. उस पर दूसरे उम्मीदवारों को इस कथित नेटवर्क से जोड़ने का आरोप है. मनोज कुमार पर परीक्षा में गड़बड़ी के जरिए चयन हासिल करने और ओएमआर शीट या अंकों को प्रभावित कराने का आरोप लगाया गया है. जांच एजेंसी के मुताबिक, साक्ष्य छिपाने में भी उसकी भूमिका की जांच की गई है.
बिचौलियों और परीक्षा नेटवर्क की भूमिका की जांच
धर्मेंद्र कुमार पर अभ्यर्थियों को मेरिट लिस्ट में ऊपर लाने के लिए सिंडिकेट के साथ मिलकर काम करने और पैसों के लेनदेन में शामिल होने का आरोप है. वहीं, रक्षक सिंह को दिल्ली और झारखंड के बीच सक्रिय कथित नेटवर्क का हिस्सा बताया गया है. उस पर ओएमआर शीट में हेरफेर और सॉल्वर गिरोह के जरिए परीक्षा प्रक्रिया को प्रभावित करने का आरोप है. रौशन केरकेट्टा पर घोटाले के मुख्य आरोपियों के संपर्क में रहकर अवैध तरीके से नौकरी हासिल करने की साजिश में शामिल होने का आरोप है. अरुण कुमार पर अभ्यर्थियों से संपर्क कर उन्हें पास कराने की गारंटी के नाम पर मोटी रकम तय करने और नेटवर्क को आर्थिक मदद देने का आरोप है. वहीं, ब्रज कुमार राम पर गोपनीय दस्तावेजों तक अवैध पहुंच बनाने, अभ्यर्थियों से सौदा करने और पैसों के लेनदेन में शामिल होने का आरोप लगाया गया है.
बाकी आरोपियों की तलाश जारी
CID की इस कार्रवाई के बाद 14वीं JPSC परीक्षा घोटाले की जांच एक बार फिर चर्चा में है. जांच एजेंसी का कहना है कि मामले से जुड़े दूसरे लोगों और बाकी कड़ियों की भी पड़ताल की जा रही है. एजेंसी के दावे के मुताबिक, जांच में सामने आने वाले अन्य लोगों की भूमिका भी उजागर की जाएगी.


