PESA Act/रांची : आदिवासी सुरक्षा परिषद के अध्यक्ष रमेश हांसदा ने झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) की विधायक कल्पना सोरेन के हालिया बयान की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने कहा कि कल्पना सोरेन को अपने वक्तव्य पर आत्ममंथन करना चाहिए और सदन में माफी मांगनी चाहिए।
रमेश हांसदा ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि जब झारखंड का नेतृत्व भी आदिवासी समाज से ही है, तो यह दावा करना कि आदिवासियों का विकास नहीं हुआ, केवल एक राजनीतिक रणनीति है। उन्होंने आरोप लगाया कि झारखंड में आदिवासियों के विकास की आड़ में केवल कुछ गिने-चुने परिवारों का ही भला हुआ है।
हांसदा ने यह भी आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री रहते हुए कुछ नेताओं ने व्यक्तिगत लाभ उठाया और सरकारी योजनाओं के तहत अपने परिवार के नाम पर जमीन भी आवंटित करवाई। उन्होंने कहा, “आदिवासी समाज के हितों की रक्षा के बजाय कुछ नेता केवल अपने परिवार की राजनीति में व्यस्त हैं।”
इसके अलावा, उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के संघर्ष का उदाहरण देते हुए कहा कि उनका सफर आदिवासी समाज के लिए एक प्रेरणा है। “उन्होंने अपनी मेहनत के बलबूते जंगल से लेकर देश के सर्वोच्च पद तक का सफर तय किया, जो आदिवासियों की क्षमता और संघर्षशीलता को दर्शाता है,” हांसदा ने कहा।
झारखंड में पेशा कानून की नियमावली को लागू करने में देरी पर चिंता व्यक्त करते हुए हांसदा ने कहा कि आदिवासी संस्कृति पर लगातार हमले हो रहे हैं, लेकिन नेतृत्व इस पर मौन बना हुआ है। उन्होंने कल्पना सोरेन से आत्मविश्लेषण करने और अपने बयान पर पुनर्विचार करने की अपील की।