Jharkhand News: झारखंड की कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने धर्म के नाम पर हिंसा को सही ठहराने और अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाने वालों को दबाने की कोशिशों पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा कि धर्म इंसानियत और आपसी सम्मान की सीख देता है, न कि नफरत और हिंसा की. मंत्री ने साफ कहा कि लोकतंत्र में हर नागरिक को अपनी बात रखने और अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने का अधिकार है.
धर्म के नाम पर हिंसा का बचाव गलत
शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कि धर्म को हिंसा का जरिया बनाना किसी भी तरह सही नहीं है. आस्था का मतलब दूसरों का सम्मान करना और समाज में शांति बनाए रखना है. उन्होंने महिलाओं के खिलाफ हिंसा को सही ठहराने के लिए धर्म का सहारा लेने पर भी सवाल उठाए. मंत्री ने पूछा कि क्या अब अपने अधिकार मांगना और अन्याय के खिलाफ बोलना भी अपराध माना जाएगा?
दिल्ली पुलिस की भूमिका पर उठाए सवाल
कृषि मंत्री ने महिलाओं और युवाओं के साथ हुई घटनाओं को लेकर दिल्ली पुलिस से जवाब मांगा. उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की जिम्मेदारी का जिक्र करते हुए कहा कि पुलिस और प्रशासन को बताना चाहिए कि अपनी बात रखने वालों के साथ ऐसा व्यवहार क्यों किया जाता है. उन्होंने कहा कि महिलाओं और छात्रों की आवाज दबाकर लोकतंत्र की रक्षा नहीं की जा सकती.
युवाओं की आवाज दबाना आसान नहीं
शिल्पी नेहा तिर्की के मुताबिक, पुलिस और डर के जरिए लोगों को चुप कराने की कोशिश हो सकती है, लेकिन उनके विचारों को खत्म नहीं किया जा सकता. उन्होंने कहा कि आज के युवा और जेन-जी अपने अधिकारों, संविधान और लोकतंत्र को लेकर जागरूक हैं. आवाज दबाने की कोशिश से विरोध और मजबूत होगा.
12 अक्टूबर को आवाज उठाने की बात
मंत्री ने कहा कि 12 अक्टूबर को कांग्रेस, INDIA गठबंधन और देश के युवा लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए अपनी आवाज उठाएंगे. उन्होंने दिल्ली की सड़कों पर हुई घटनाओं के लिए जवाबदेही तय करने की मांग भी की. उनका कहना है कि लोकतंत्र में असहमति के लिए जगह होनी चाहिए और हर नागरिक को अपनी बात रखने का मौका मिलना चाहिए.
महिलाओं के सम्मान को बताया जरूरी
शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कि महिलाओं पर हाथ उठाना या कमजोर लोगों को डराना बहादुरी नहीं है. असली साहस अन्याय के खिलाफ खड़े होने में है. उन्होंने जोर दिया कि हर व्यक्ति के अधिकारों का सम्मान करना लोकतांत्रिक समाज की बुनियादी जिम्मेदारी है.


