Jharkhand: कृषि विभाग के अनुसार, राज्य में 18 लाख हेक्टेयर में धान लगाने का लक्ष्य है। इसके विरुद्ध 13 जुलाई तक महज 1 लाख 47 हजार हेक्टेयर में धनरोपनी हुई है। यानी अब तक महज 8.19 प्रतिशत रोपनी हुई है। करीब 92 फीसदी धान के खेत खाली हैं। राज्य में अभी तक मात्र 147.382 हेक्टेयर में धान की फसल लगी है। जिसमें से 43.735 हेक्टेयर खेतों में सीधी बुनाई हुई है, जबकि, 103.652 हेक्टेयर में रोपनी हुई है।
बीते साल सूखा झेल चुके किसान इस बार भी मानसून की बेरुखी से चिंतित हैं। बारिश के इंतजार में पहले बिचड़ा लगाने में देर हुई। बड़ी मुश्किल से बिचड़े लगे तो वे भी पानी के अभाव में सूख रहे हैं। राज्य में मानसून की स्थिति यह है कि आधा जुलाई बीत चुका है पर राज्य में अभी सामान्य से 78 फीसदी कम बारिश हुई है। नतीजतन, धान की रोपनी भी लक्ष्य का मात्र 8 फीसदी हुई है। सात जिलों में रोपनी का प्रतिशत जीरो है।
राज्य के सात जिलों रांची, पलामू, गढ़वा, लातेहार, सिमडेगा, पश्चिमी सिंहभूम एवं सरायकेला में अब तक रोपनी का प्रतिशत शून्य है। वहीं पूर्वी सिंहभूम में 1.10 लाख हेक्टेयर के लक्ष्य के विरुद्ध अब तक 83.470 लाख हेक्टेयर, यानी 75.88 प्रतिशत खेतों में धान की फसल लगाई जा चुकी है।
झारखंड के कोल्हान में 14.34%, दक्षिणी छोटानागपुर 15.59%, उत्तरी छोटानागपुर 16.26%, पलामू 27.13% और संताल में 35.77% बारिश हुई है। सुखाड़ को लेकर विभाग भी चिंतित है। तीन-चार दिनों में अच्छी बारिश नहीं हुई तो स्थिति गंभीर हो सकती है। मौसम अनुकूल बीजों की भी तैयारी की जा रही है।
प्रमंडलवार आंकड़े देखें तो पलामू की स्थिति सबसे खराब है। यहां अब तक कहीं रोपनी नहीं हुई है। यहां बारिश भी अब तक मात्र 27 प्रतिशत हुई है। वहीं उत्तरी छोटानागपुर में सर्वाधिक 7.70, संताल में 5.91 जबकि दक्षिणी छोटानागपुर में अब तक मात्र 2.91 प्रतिशत धान की रोपनी हुई है।
उत्तरी छोटानागपुर के सात जिला समेत नौ जिलों में 25.49 प्रतिशत खेतों में धान की खेती केवल सीधी बुनाई से हुई है। हजारीबाग, रामगढ़, चतरा, कोडरमा, गिरिडीह, धनबाद व बोकारो में 25.90 लाख हेक्टेयर में धान की खेती सीधी बुनाई से हुई है। खूंटी व दुमका में भी अब तक कुल खेती सीधी बुनाई से की गयी है।
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