CMPFO CBI Investigation: कोल माइंस प्रोविडेंट फंड ऑर्गेनाइजेशन यानी CMPFO के 727.67 करोड़ रुपये डूबने के मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने बड़ा आदेश दिया है. अदालत ने पूरे मामले की जांच सीबीआई से कराने का निर्देश दिया है. चीफ जस्टिस एमएस सोनक की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने कोल एम्पलाई वेलफेयर एसोसिएशन की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया. इसके साथ ही याचिका का निष्पादन कर दिया गया. याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अनिल कुमार सिंह ने अदालत में पक्ष रखा.
DHFL में लगाया गया था 1300 करोड़ रुपये
मामला दीवान हाउसिंग फाइनेंस कॉरपोरेशन लिमिटेड यानी DHFL में CMPFO के 1300 करोड़ रुपये के निवेश से जुड़ा है. जून 2019 में फंड मैनेजर SBI और UTI ने DHFL की आर्थिक स्थिति को लेकर रेड अलर्ट जारी किया था. दोनों ने निवेश की रकम निकालने की सलाह दी थी. इसके बावजूद तत्कालीन बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज ने समय रहते कदम नहीं उठाया.
कंपनी के दिवालिया होने से डूबे 727.67 करोड़
DHFL के दिवालिया होने के बाद CMPFO के 727.67 करोड़ रुपये डूब गए. बताया गया कि पैसा निकालने का प्रस्ताव करीब छह महीने बाद दिसंबर 2019 में पारित किया गया. बाद में नवंबर 2021 में इन्वेस्टमेंट सब-कमेटी ने इस नुकसान को राइट ऑफ करने का प्रस्ताव रखा. कर्मचारियों ने इसका विरोध किया.
नुकसान की भरपाई के लिए सेस लगाने की योजना
मामले में नुकसान की भरपाई के लिए कोयला उत्पादन पर 10 रुपये प्रति टन सेस लगाने की योजना भी बनाई गई थी. वहीं, विभागीय कार्रवाई का सामना कर रहे तत्कालीन अधिकारियों को CMPFO की ओर से क्लीन चिट दिए जाने पर हाईकोर्ट ने नाराजगी जताई. अदालत में इस संबंध में शपथ पत्र भी दाखिल किया गया था.
CBI जांच से तय होगी जिम्मेदारी
हाईकोर्ट के सीबीआई जांच के आदेश के बाद अब इस मामले में जिम्मेदार लोगों की भूमिका की जांच होगी. कोल कर्मचारियों के भविष्य निधि से जुड़े इतने बड़े नुकसान में किस स्तर पर लापरवाही हुई, इसकी जांच CBI करेगी.


