Jamshedpur Property Dispute: बिष्टुपुर के रामदास भट्टा स्थित संपत्ति को लेकर 5 करोड़ रुपये रंगदारी मांगने और जबरन कब्जा करने के लगाए गए आरोपों के बीच अब अशोक सिंह ने अपना पक्ष सामने रखा है। उन्होंने इन आरोपों को खारिज करते हुए पूरे मामले की टाइमलाइन पर सवाल उठाया है। अशोक सिंह का कहना है कि यदि उनके खिलाफ लगाए जा रहे आरोपों के मुताबिक उनसे बंदूक की नोक पर पैसे लिए गए या जबरन पावर ऑफ अटॉर्नी कराया गया था, तो इसकी शिकायत करीब दो साल बाद क्यों की जा रही है।
अशोक सिंह ने कहा कि विक्रम शर्मा के साथ भूपेंद्र सिंह के कारोबारी संबंध रहे हैं और दोनों के बीच लंबे समय से लेन-देन तथा व्यवसायिक गतिविधियां होती रही हैं। उनका कहना है कि ऐसे में अब अचानक यह दावा किया जाना कि पैसा बंदूक की नोक पर लिया गया या संपत्ति से जुड़े दस्तावेज जबरन तैयार कराए गए, कई सवाल खड़े करता है।
अशोक सिंह ने यह भी दावा किया कि शहर में कई ऐसे व्यापारी हैं, जो विक्रम शर्मा के साथ कारोबार करते थे। हालांकि, उन्होंने किसी व्यापारी का नाम सार्वजनिक रूप से लेने से इनकार किया। उनका कहना है कि पुराने कारोबारी रिश्तों को अब अलग तरीके से पेश किया जा रहा है।
अशोक सिंह ने आरोप लगाया कि विक्रम शर्मा की मौत के बाद उनके नाम से जुड़े कारोबार में कथित तौर पर ईडी और इनकम टैक्स से संबंधित परेशानियां सामने आ रही हैं। उनका दावा है कि इन परिस्थितियों से बचने के लिए पुराने कारोबारी लेन-देन और संपत्ति विवाद को अलग रूप देने की कोशिश की जा रही है।
हालांकि, अशोक सिंह ने स्पष्ट किया कि यह उनका पक्ष है और पूरे मामले की वास्तविकता जांच के बाद ही सामने आ सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि 23 मार्च से पहले विक्रम उद्योग से उनका कोई लेना-देना नहीं था।
संपत्ति विवाद के संबंध में अशोक सिंह ने एक और अहम दावा किया। उनके मुताबिक, अब उक्त मकान के लिए किसी दूसरे व्यक्ति की ओर से अधिक कीमत दिए जाने का लालच दिया जा रहा है और संपत्ति को किसी अन्य व्यक्ति को बेचने की कोशिश की जा रही है। उनका कहना है कि इसी वजह से उनके खिलाफ इस तरह के आरोप लगाए जाने की आशंका है।
पावर ऑफ अटॉर्नी को लेकर अशोक सिंह ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति अपनी इच्छा से पावर ऑफ अटॉर्नी कराता है, तो बाद में संपत्ति या कारोबारी परिस्थितियां बदलने के बाद यह कहना कि दस्तावेज जबरदस्ती कराया गया था, गंभीर सवाल खड़े करता है। उन्होंने कहा कि इस मामले में पावर ऑफ अटॉर्नी से जुड़े दस्तावेजों और उसके तैयार होने की परिस्थितियों की भी जांच होनी चाहिए।
अशोक सिंह ने कहा कि करीब दो साल बाद लगाए जा रहे आरोपों की टाइमलाइन को भी जांच के दायरे में रखा जाना चाहिए। उनके मुताबिक, पुराने कारोबारी संबंधों, लेन-देन और पावर ऑफ अटॉर्नी से जुड़े दस्तावेजों की जांच के बाद ही पूरे मामले की तस्वीर स्पष्ट हो सकती है।
फिलहाल बिष्टुपुर रामदास भट्टा की संपत्ति को लेकर विवाद में दोनों पक्षों की ओर से अलग-अलग दावे सामने आए हैं। एक ओर भूपेंद्र सिंह ने पुलिस के समक्ष गंभीर आरोप लगाए हैं, वहीं अशोक सिंह ने इन आरोपों को खारिज करते हुए मामले को कारोबारी संबंधों और संपत्ति विवाद से जोड़कर देखा है। ऐसे में पूरे घटनाक्रम में लगाए गए आरोपों की सत्यता, दस्तावेजों और संबंधित पक्षों के बयानों की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।


