Jharkhand TB Patients Tracking: झारखंड में टीबी मरीजों की पहचान, जांच और इलाज को बेहतर बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने नई पहल शुरू की है. राज्य के 17 जिलों में 14,500 से ज्यादा टीबी मरीजों की ट्रैकिंग की जाएगी. इसके लिए नेशनल हेल्थ मिशन ने ‘पेशेंट प्रोवाइडर सपोर्ट एजेंसी’ के चयन की प्रक्रिया शुरू कर दी है. इस पहल का खास फोकस प्राइवेट अस्पतालों और क्लीनिकों में इलाज करा रहे टीबी मरीजों पर रहेगा.
दो क्लस्टर में बांटे गए 17 जिले
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 17 जिलों को दो क्लस्टर में बांटा गया है. क्लस्टर 2 में गिरिडीह, बोकारो, रामगढ़, हजारीबाग, कोडरमा, चतरा, लातेहार, पलामू और गढ़वा शामिल हैं. इन जिलों में करीब 6,250 टीबी मरीज हैं. वहीं, क्लस्टर 3 में रांची, लोहरदगा, गुमला, खूंटी, सरायकेला, पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम और सिमडेगा शामिल हैं. इन जिलों में टीबी मरीजों की संख्या करीब 8,250 है.
रांची में करीब 4,800 मरीजों पर खास नजर
क्लस्टर 3 में रांची का आंकड़ा सबसे अहम है. अकेले रांची जिले में करीब 4,800 टीबी मरीज प्राइवेट सेक्टर में इलाज कराते हैं. स्वास्थ्य विभाग अब ऐसे मरीजों को सरकारी रिकॉर्ड से जोड़ने पर जोर देगा. इससे मरीजों की सही संख्या का पता लगाने और उनका इलाज समय पर पूरा कराने में मदद मिलेगी.
प्राइवेट मरीजों का डेटा जुटाना बड़ी चुनौती
स्वास्थ्य विभाग के सामने बड़ी चुनौती प्राइवेट अस्पतालों और क्लीनिकों में इलाज करा रहे मरीजों की सही जानकारी जुटाना है. कई बार इन मरीजों का पूरा डेटा सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज नहीं हो पाता. इससे टीबी की रोकथाम और मरीजों की निगरानी में परेशानी आती है. अब चुनी जाने वाली एजेंसी सरकारी और निजी स्वास्थ्य संस्थानों के बीच संपर्क का काम करेगी.
जांच से लेकर दवा तक होगी निगरानी
पेशेंट प्रोवाइडर सपोर्ट एजेंसी का काम सिर्फ मरीजों की पहचान तक सीमित नहीं रहेगा. एजेंसी मरीजों की जांच, इलाज और रिपोर्टिंग की पूरी प्रक्रिया पर नजर रखेगी. सही डायग्नोस्टिक जांच से मरीज को जोड़ना, समय पर दवा उपलब्ध कराना और एचआईवी व DST जांच सुनिश्चित करना भी इसकी जिम्मेदारी होगी. इसके अलावा मरीजों को जरूरी सहायता देने और डॉक्टरों को मिलने वाले इंसेंटिव समय पर दिलाने पर भी ध्यान दिया जाएगा. स्वास्थ्य विभाग की इस पहल से टीबी मरीजों की सही जानकारी जुटाने और इलाज की व्यवस्था को बेहतर बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है.


