Waqf Amendment Bill :लोकसभा में बुधवार को वक्फ संशोधन बिल पेश किया गया, जिसे अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने “यूनीफाइड वक्फ मैनेजमेंट इम्पावरमेंट, इफिशिएंसी एंड डेवलपमेंट” (यूनीफाइड वक्फ) नाम दिया। इस बिल को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली।
सरकार ने इसे वक्फ संपत्तियों के पारदर्शी प्रबंधन और विकास के लिए आवश्यक बताया, जबकि विपक्ष ने इसे मुस्लिम समुदाय के अधिकारों में दखल करार दिया। चर्चा के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि यह बिल माइनॉरिटी समुदाय की संपत्तियों की सुरक्षा के लिए लाया गया है, न कि उन्हें नुकसान पहुंचाने के लिए।गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में इस बिल को लेकर विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि विपक्ष केवल वोट बैंक की राजनीति कर रहा है और मुस्लिम समुदाय को बेवजह डराने की कोशिश कर रहा है।
उन्होंने साफ किया कि इस कानून का उद्देश्य वक्फ संपत्तियों की पारदर्शिता और प्रभावी प्रबंधन सुनिश्चित करना है। शाह ने यह भी कहा कि इस बिल में गैर-इस्लामिक समुदायों को वक्फ बोर्ड में शामिल करने का कोई प्रावधान नहीं है और न ही यह किसी भी धार्मिक मामले में हस्तक्षेप करता है।
इस बिल के तहत वक्फ संपत्तियों के सत्यापन का अधिकार कलेक्टर को दिया गया है, जिससे अवैध कब्जों पर रोक लग सकेगी और वक्फ संपत्तियों के सही प्रबंधन को सुनिश्चित किया जा सकेगा। अमित शाह ने इस पर भी जोर दिया कि वक्फ मुस्लिम समुदाय का प्रतिनिधि निकाय नहीं है, बल्कि यह धार्मिक उद्देश्यों के लिए बनाई गई संस्था है, जिसे मुस्लिम समुदाय के लोग ही चला सकते हैं।
विपक्ष ने इस बिल को लेकर कई सवाल उठाए और इसे मुस्लिम समुदाय के अधिकारों पर हमला बताया। विपक्षी दलों ने सरकार पर आरोप लगाया कि वह धार्मिक मामलों में दखल दे रही है और वक्फ संपत्तियों को जब्त करने की कोशिश कर रही है।
इस पर जवाब देते हुए अमित शाह ने कहा कि सरकार केवल संपत्तियों की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए काम कर रही है और इस कानून का कोई भी प्रावधान किसी समुदाय के खिलाफ नहीं है। उन्होंने नागरिकता संशोधन कानून (CAA) का जिक्र करते हुए कहा कि जब वह कानून लाया गया था, तब भी विपक्ष ने भ्रम फैलाया था, लेकिन आज तक किसी की नागरिकता नहीं गई।
सरकार के अनुसार, यह कानून आने वाले वर्षों में मुस्लिम समुदाय के लिए फायदेमंद साबित होगा और उनकी संपत्तियों का बेहतर संरक्षण हो सकेगा। अमित शाह ने कहा कि चार साल बाद लोग खुद समझेंगे कि यह कानून उनके हित में है। सरकार और विपक्ष के बीच इस बिल को लेकर जारी बहस के बीच यह देखना दिलचस्प होगा कि आगे क्या राजनीतिक रुख अपनाया जाता है और यह कानून किस तरह लागू किया जाता है।