Tusu Festival Jamshedpur: पारंपरिक वेशभूषा में जुटे महिला-पुरुष‚ दिखी सांस्कृतिक झलक

Tusu Festival Jamshedpur: जमशेदपुर के हूडलूंग में देसुआ आदिवासी कुड़मी समाज की ओर से टुसु पर्व के अवसर पर भव्य टुसु विदाई सह शोभा यात्रा का आयोजन किया गया। इस मौके पर बड़ी संख्या में ग्रामीण महिला-पुरुष पारंपरिक वेशभूषा में शामिल हुए। पूरे क्षेत्र में उत्सव और उल्लास का माहौल

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Tusu Festival Jamshedpur: पारंपरिक वेशभूषा में जुटे महिला-पुरुष‚ दिखी सांस्कृतिक झलक

Tusu Festival Jamshedpur: जमशेदपुर के हूडलूंग में देसुआ आदिवासी कुड़मी समाज की ओर से टुसु पर्व के अवसर पर भव्य टुसु विदाई सह शोभा यात्रा का आयोजन किया गया। इस मौके पर बड़ी संख्या में ग्रामीण महिला-पुरुष पारंपरिक वेशभूषा में शामिल हुए। पूरे क्षेत्र में उत्सव और उल्लास का माहौल देखने को मिला।

कुड़माली संस्कृति में वर्ष भर 12 माह में 13 पर्व मनाए जाते हैं, जिनमें टुसु पर्व का विशेष महत्व है। टुसु पर्व को कुड़माली नववर्ष का अंतिम पर्व माना जाता है। यह पर्व पूरे एक महीने तक चलता है, जिसमें कुंवारी युवतियों द्वारा टुसु की स्थापना की जाती है और प्रतिदिन पूजा-अर्चना व सांस्कृतिक गतिविधियां होती हैं।

पूरे महीने चले धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के बाद आज विधि-विधान के साथ टुसु का विसर्जन किया गया। विसर्जन से पूर्व गांव की महिलाएं हाथों में पारंपरिक चौड़ल लेकर शोभा यात्रा में शामिल हुईं। ढोल-नगाड़ों और लोकगीतों की गूंज के बीच शोभा यात्रा गांव के प्रमुख मार्गों से गुजरती हुई विसर्जन स्थल तक पहुंची।

शोभा यात्रा के दौरान पारंपरिक गीतों और नृत्यों ने पूरे माहौल को जीवंत बना दिया। श्रद्धालुओं ने आस्था और श्रद्धा के साथ टुसु को विदाई दी। यह दृश्य कुड़माली संस्कृति की जीवंतता और सामूहिक सहभागिता को दर्शाता रहा।

टुसु पर्व केवल धार्मिक आस्था का पर्व नहीं है, बल्कि यह कुड़माली समाज की संस्कृति, परंपरा और सामाजिक एकता को मजबूत करने का माध्यम भी है। हर वर्ष की तरह इस बार भी पूरे उत्साह और परंपरागत तरीके से टुसु विदाई समारोह का आयोजन किया गया।

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