train accident: छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में हाल ही में हुई भीषण ट्रेन दुर्घटना की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट पर अब विवाद गहरा गया है। इस हादसे में एक स्थानीय मेमू ट्रेन के मालगाड़ी से टकरा जाने पर लोको पायलट सहित 11 लोगों की मौत हो गई थी और कई यात्री घायल हुए थे। रेलवे विशेषज्ञों की पांच सदस्यीय टीम ने अपनी अंतरिम जांच में मेमू ट्रेन के चालक दल को दुर्घटना के लिए जिम्मेदार ठहराया है, लेकिन लोको पायलट यूनियन ने इस निष्कर्ष को ‘तथ्यात्मक रूप से गलत’ बताया है।
ऑल इंडिया लोको रनिंग स्टाफ एसोसिएशन (एआईएलआरएसए) ने संबंधित रेलवे जोन को पत्र लिखकर कहा कि प्रारंभिक रिपोर्ट ‘काल्पनिक विवरणों’ पर आधारित है। रिपोर्ट में दर्ज सिग्नल नंबरों को गलत बताया गया है और यूनियन का आरोप है कि जांच टीम ने महत्वपूर्ण तकनीकी तथ्यों की अनदेखी की है। एआईएलआरएसए बिलासपुर के जोनल महासचिव वी.के. तिवारी ने दावा किया कि रिपोर्ट पूर्वाग्रह के साथ तैयार की गई है ताकि चालक दल पर दोष मढ़ा जा सके और रेलवे प्रशासन की प्रणालीगत कमियों को छिपाया जा सके।
एआईएलआरएसए महासचिव अशोक कुमार राउत ने कहा कि ट्रेन की गति का फ्लो चार्ट प्रारंभिक रिपोर्ट से मेल नहीं खाता। उन्होंने बताया कि मेमू चालक दल ने एक सिग्नल 42 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से पार किया, लेकिन यदि अगला सिग्नल लाल था तो गति अचानक 73 किमी प्रति घंटे तक क्यों बढ़ेगी। राउत का कहना है कि इससे संकेत मिलता है कि सिग्नल संभवतः हरा था, जिसके कारण चालक दल ने गति बढ़ाई।उन्होंने यह भी कहा कि टक्कर से ठीक पहले आपातकालीन ब्रेक लगाए जाने के स्पष्ट प्रमाण फ्लो चार्ट में मौजूद हैं। राउत के अनुसार, जब चालक दल ने सामने मालगाड़ी देखी तो उन्होंने तुरंत नियंत्रण की कोशिश की, लेकिन दूरी कम होने के कारण टक्कर टल नहीं सकी।
यूनियन ने कहा कि रेलवे सुरक्षा आयुक्त (सीआरएस) की विस्तृत जांच अभी प्रारंभिक चरण में है, इसलिए किसी को भी दोषी ठहराना समयपूर्व और अनुचित है। एआईएलआरएसए का आग्रह है कि अंतिम रिपोर्ट आने से पहले किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना न केवल गलत होगा बल्कि इससे दुर्घटना के वास्तविक कारणों की पहचान प्रभावित हो सकती है।
इस घटना ने न केवल सुरक्षा मानकों पर सवाल खड़े किए हैं बल्कि जांच प्रक्रिया की पारदर्शिता पर भी बहस छेड़ दी है। यूनियन का कहना है कि निष्पक्ष जांच ही जरूरत है ताकि भविष्य में ऐसी दुर्घटनाओं को रोका जा सके और रेलवे तंत्र की वास्तविक खामियों को दूर किया जा सके।


