ट्रैफिक पुलिस की मानवता: वोल्टास गोलचक्कर पर अफरा-तफरी‚ ट्रैफिक पुलिस बनी सहारा

ट्रैफिक पुलिस की मानवता: अक्सर सवालों के कटघरे में खड़ी रहने वाली पुलिस व्यवस्था ने जमशेदपुर के बिष्टुपुर इलाके में एक अलग और सकारात्मक तस्वीर पेश की। वोल्टास गोलचक्कर के समीप एक स्कूटी सवार महिला सड़क हादसे का शिकार हो गई और संतुलन बिगड़ने के कारण बीच सड़क पर गिर

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ट्रैफिक पुलिस की मानवता: अक्सर सवालों के कटघरे में खड़ी रहने वाली पुलिस व्यवस्था ने जमशेदपुर के बिष्टुपुर इलाके में एक अलग और सकारात्मक तस्वीर पेश की। वोल्टास गोलचक्कर के समीप एक स्कूटी सवार महिला सड़क हादसे का शिकार हो गई और संतुलन बिगड़ने के कारण बीच सड़क पर गिर पड़ी। अचानक हुए हादसे से मौके पर अफरा-तफरी मच गई और राहगीरों की भीड़ जमा हो गई।

इसी दौरान वहां तैनात ट्रैफिक पुलिस के एएसआई ब्रजेश कुमार और विजय कुमार ने स्थिति को गंभीरता से समझते हुए बिना किसी देरी के मदद का जिम्मा संभाल लिया। दोनों अधिकारियों ने न तो हालात का इंतज़ार किया और न ही ड्यूटी की औपचारिकताओं में समय गंवाया, बल्कि तुरंत अपनी फर्स्ट एड किट निकालकर घायल महिला को प्राथमिक उपचार देना शुरू कर दिया।

सड़क पर गिरी महिला को खून बहने और चोट की स्थिति में तत्काल सहायता की आवश्यकता थी। ट्रैफिक पुलिस कर्मियों ने मौके पर ही घावों की सफाई कर प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराया, जिससे महिला की हालत को स्थिर रखने में मदद मिली। इस दौरान पुलिसकर्मियों की संवेदनशीलता और मानवीय दृष्टिकोण स्पष्ट रूप से देखने को मिला।

यह घटना केवल एक दुर्घटना तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसने यह भी साबित कर दिया कि कानून व्यवस्था संभालने वाली पुलिस जब इंसानियत के साथ आगे बढ़ती है, तो वह समाज के लिए उम्मीद बन जाती है। न कोई सख्त व्यवहार, न कोई बहाना—सिर्फ जिम्मेदारी और मानवता का परिचय।

बिष्टुपुर की इस घटना ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि कई बार कानून से पहले इंसान बनना ज़रूरी होता है। जमशेदपुर ट्रैफिक पुलिस के इन दो अधिकारियों की तत्परता ने न सिर्फ एक घायल महिला को समय पर सहायता दी, बल्कि आम लोगों के बीच पुलिस के प्रति भरोसे को भी मजबूत किया।

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