Traffic Check Bias: शहर के विभिन्न इलाकों में चल रही यातायात जांच के दौरान उस समय विवाद खड़ा हो गया, जब यातायात पुलिस उपाधीक्षक द्वारा किए जा रहे निरीक्षण के बीच नियमों के समान रूप से पालन न होने के आरोप सामने आए। प्रत्यक्षदर्शियों और वाहन चालकों का कहना है कि जांच के दौरान कार्रवाई में भेदभाव देखा गया, जिससे कानून की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो गए हैं।
जानकारी के अनुसार, यातायात पुलिस उपाधीक्षक श्री नीरज शहर में चल रही जांच का निरीक्षण करते नजर आए। इसी दौरान आरोप लगाया गया कि यदि कोई महिला चालक यातायात नियमों का उल्लंघन करती पाई गई, तो उसे चेतावनी देकर छोड़ दिया गया, जबकि वही गलती करने वाले पुरुष चालकों से बिना किसी रियायत के चालान वसूला गया।
इस कथित व्यवहार के बाद वाहन चालकों के बीच यह चर्चा तेज हो गई कि क्या कानून की किताब में पुरुष और महिला के लिए अलग-अलग नियम लिखे हैं। लोगों का कहना है कि यदि नियम तोड़ने पर निर्णय मौके पर ही बदल जाता है, तो यातायात जांच का उद्देश्य ही सवालों के घेरे में आ जाता है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि यातायात जांच का मकसद जागरूकता और नियमों का समान पालन सुनिश्चित करना होता है, लेकिन यदि कार्रवाई चयनात्मक होगी तो इससे आमजन का भरोसा कमजोर होगा। निरीक्षण के दौरान वरिष्ठ अधिकारी की मौजूदगी के बावजूद यदि ऐसे आरोप लगते हैं, तो यह व्यवस्था की पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न लगाता है।
इस पूरे मामले को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यातायात नियम सभी नागरिकों के लिए बराबर हैं, या फिर जांच के नाम पर भेदभाव किया जा रहा है। फिलहाल आमजन संबंधित यातायात अधिकारियों के स्पष्टीकरण और भविष्य में निष्पक्ष कार्रवाई की उम्मीद कर रहे हैं।


