Humanity Through Service: थैलेसीमिया जैसी गंभीर बीमारी से लंबी जंग लड़ने के बाद 19 फरवरी 2024 को दुनिया को अलविदा कह चुकी प्रियंका मुखर्जी आज जीवित होतीं तो 25 वर्ष की होतीं। जमशेदपुर की प्रियंका मुखर्जी न केवल तेज-तर्रार थीं, बल्कि शिक्षा के क्षेत्र में भी बेहद प्रतिभावान मानी जाती थीं। बचपन से ही थैलेसीमिया से ग्रसित प्रियंका ने जीवन के हर उतार-चढ़ाव में साहस के साथ इस बीमारी का सामना किया, लेकिन अंततः वह इस जंग को जीत नहीं सकीं।
प्रियंका की यादों को सहेजते हुए उनके माता-पिता देवीदास मुखर्जी और मणिककंना मुखर्जी ने उनके 25वें जन्मदिन को मानव कल्याणकारी कार्य के रूप में समर्पित करने का निर्णय लिया। “नर सेवा ही नारायण सेवा” के भाव के साथ वे टीम पीएसएफ (प्रतीक संघर्ष फाउंडेशन) के सदस्यों के साथ जमशेदपुर के बिष्टुपुर थाना क्षेत्र स्थित एमटीएमएच कैंसर अस्पताल के समीप बने रेस्ट हाउस पहुंचे।
रेस्ट हाउस में रह रहे कैंसर पीड़ित मरीजों और उनके परिजनों के बीच प्रियंका के जन्मदिन के अवसर पर स्वादिष्ट भोजन की व्यवस्था की गई। इस पहल का उद्देश्य केवल भोजन वितरण नहीं, बल्कि पीड़ा और संघर्ष से जूझ रहे लोगों के बीच कुछ पल की खुशी बांटना था। माता-पिता ने बताया कि अपने गम को कम करने का इससे बेहतर तरीका उन्हें मानव सेवा के रूप में दिखाई दिया।
इस अवसर पर टीम पीएसएफ ने प्रियंका मुखर्जी को उनके 25वें जन्मदिन पर नम आंखों से शत-शत नमन करते हुए भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। टीम ने कहा कि ऐसा परिवार, ऐसी सोच और ऐसा कार्य समाज के लिए प्रेरणास्रोत है, जो दुख को भी सेवा और संवेदना में बदल देता है।
सेवा कार्यक्रम के दौरान संजय चौधरी, टीम पीएसएफ के निदेशक अरिजीत सरकार, उत्तम कुमार गोराई, कुमारेस हाजरा, रवि शंकर, किशोर साहू, अनिल प्रसाद और सौरभ चटर्जी सहित कई सदस्य उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में प्रियंका की स्मृति को नमन करते हुए मानव सेवा के इस प्रयास की सराहना की।


