Hazaribagh Central Jail: पहले धनबाद फिर थाना से भागा‚ बार-बार कानून को चुनौती

Hazaribagh Central Jail: “जेल की हर हार जंजीर तोड़ने वाला” यह फिल्मी संवाद एक बार फिर लोयाबाद के कुख्यात अपराधी देवा भुईयां पर सटीक बैठता नजर आ रहा है। शातिर अपराधी देवा भुईयां ने हजारीबाग सेंट्रल जेल से अपने तीन साथियों के साथ फरार होकर पुलिस और जेल प्रशासन की

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Hazaribagh Central Jail: “जेल की हर हार जंजीर तोड़ने वाला” यह फिल्मी संवाद एक बार फिर लोयाबाद के कुख्यात अपराधी देवा भुईयां पर सटीक बैठता नजर आ रहा है। शातिर अपराधी देवा भुईयां ने हजारीबाग सेंट्रल जेल से अपने तीन साथियों के साथ फरार होकर पुलिस और जेल प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह घटना हाल के समय की सबसे बड़ी जेल फरारी में से एक मानी जा रही है।

यह पहली बार नहीं है जब देवा भुईयां ने कानून को खुली चुनौती दी हो। इससे पहले वह धनबाद जेल से फरार हो चुका है और उससे भी पहले लोयाबाद थाना परिसर से पुलिस को चकमा देकर भागने में सफल रहा था। हर बार उसकी फरारी ने सुरक्षा इंतजामों की पोल खोल दी और पुलिस प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती साबित हुई।

धनबाद जेल से फरारी के करीब तीन साल बाद देवा भुईयां एक बार फिर लोयाबाद पुलिस के हत्थे चढ़ा था। लगभग एक साल पहले दिसंबर महीने में तत्कालीन लोयाबाद थाना प्रभारी सत्यजीत कुमार ने सेन्द्रा 10 नंबर इलाके से उसे गिरफ्तार किया था। इसके बाद उसे धनबाद जेल भेजा गया और सुरक्षा कारणों से बाद में हजारीबाग सेंट्रल जेल ट्रांसफर किया गया, लेकिन वहां भी सुरक्षा व्यवस्था उसे रोक नहीं सकी।

देवा भुईयां इलाके का एक शातिर और खतरनाक अपराधी माना जाता है। उसके खिलाफ कतरास थाना, राजगंज, ईस्ट बसूरिया, लोयाबाद समेत विभिन्न थानों में कुल 9 आपराधिक मामले दर्ज हैं। वह पॉक्सो एक्ट के तहत सजायाफ्ता है और धनबाद कोर्ट ने उसे इस गंभीर मामले में 20 साल की सजा सुनाई थी। वर्ष 2016 में कतरास थाना में उसके खिलाफ पहला गंभीर मामला दर्ज हुआ था।

देवा भुईयां के फरार होने की खबर सामने आते ही सोशल मीडिया और विभिन्न न्यूज चैनलों पर मामला तेजी से सुर्खियों में आ गया। इलाके में दहशत का माहौल है, वहीं बार-बार हो रही फरारी ने पुलिस और जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

फिलहाल पुलिस की कई टीमें देवा भुईयां और उसके साथ फरार हुए आरोपियों की तलाश में लगातार छापेमारी कर रही हैं। जेल से फरारी की यह घटना न केवल सुरक्षा व्यवस्था की खामियों को उजागर करती है, बल्कि यह भी सोचने पर मजबूर करती है कि आखिर कब तक एक कुख्यात अपराधी इस तरह कानून को चुनौती देता रहेगा।

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