Farm Land Protest: जमशेदपुर के पोटका प्रखंड अंतर्गत संकरदा गांव में कृषि योग्य भूमि की घेराबंदी को लेकर ग्रामीणों का विरोध सामने आया है। ग्रामीणों का आरोप है कि हाल के दिनों में कुछ व्यापारियों द्वारा बड़े पैमाने पर खेती की जमीन खरीदी जा रही है और उस पर घेराबंदी कर दी गई है, जिससे गांव की पारंपरिक कृषि व्यवस्था और पशुपालन पर गंभीर संकट उत्पन्न हो गया है।
स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि जिन जमीनों पर वर्षों से खेती होती आ रही थी, उन्हीं जमीनों को व्यापारिक उद्देश्य से खरीदा जा रहा है। घेराबंदी के चलते अब ग्रामीणों को खेतों तक पहुंचने में दिक्कत हो रही है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि कृषि भूमि को इसी तरह बंद किया गया तो न तो खेती संभव रह जाएगी और न ही गांव की आजीविका सुरक्षित रह पाएगी।
ग्रामीणों ने स्पष्ट रूप से कहा कि कृषि भूमि ही पशुओं के लिए चारा और चरागाह का प्रमुख स्रोत है। घेराबंदी होने की स्थिति में गाय, बकरी और अन्य मवेशियों को चराने की व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हो जाएगी। इससे न केवल पशुपालन संकट में पड़ेगा, बल्कि ग्रामीणों की आर्थिक स्थिति भी कमजोर होगी।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि कृषि योग्य भूमि की घेराबंदी को अविलंब रोका जाए। उनका कहना है कि खेती और पशुपालन गांव की रीढ़ है और इसे खत्म करने की कोई भी कोशिश बर्दाश्त नहीं की जाएगी। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि समस्या का समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
इस विरोध के दौरान गांव के कई गणमान्य लोग और स्थानीय ग्रामीण उपस्थित रहे। मौके पर बादल भगत (शिक्षक), सोमेन भगत, भीम सेन भगत, सलेंद्र भगत, हरे बिंदु भगत, रोहित गोप, प्रकाश पात्र, कौशिक मंडल, चंडी चरण गोप, अनादि भगत और प्रकाश भगत सहित अन्य ग्रामीण मौजूद थे। सभी ने एक स्वर में कृषि भूमि की सुरक्षा की मांग उठाई।


