Domuhani Sangam Festival: नदी पूजन से शुरुआत‚ सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने मोहा मन

Domuhani Sangam Festival: लौह नगरी जमशेदपुर के नागरिकों की आस्था, संस्कृति और पर्यावरण चेतना का प्रतीक बन चुके “दोमुहानी संगम महोत्सव 2026” का भव्य शुभारंभ आज 13 जनवरी को सोनारी स्थित पावन दोमुहानी संगम स्थल पर हुआ। स्वर्णरेखा और खरकई नदियों के संगम तट पर आयोजित यह दो दिवसीय महोत्सव

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Domuhani Sangam Festival: लौह नगरी जमशेदपुर के नागरिकों की आस्था, संस्कृति और पर्यावरण चेतना का प्रतीक बन चुके “दोमुहानी संगम महोत्सव 2026” का भव्य शुभारंभ आज 13 जनवरी को सोनारी स्थित पावन दोमुहानी संगम स्थल पर हुआ। स्वर्णरेखा और खरकई नदियों के संगम तट पर आयोजित यह दो दिवसीय महोत्सव हिन्दू उत्सव समिति एवं ‘उम्मीद एक अभियान’ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया जा रहा है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु, सामाजिक कार्यकर्ता और शहरवासी शामिल हुए।

महोत्सव के पहले दिन की शुरुआत विधिवत नदी अभिषेक और पूजन के साथ हुई। इसके पश्चात विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत गणेश वंदना और आकर्षक नृत्य प्रस्तुतियों से सांस्कृतिक कार्यक्रमों का शुभारंभ किया गया। पूरे संगम क्षेत्र में श्रद्धा, उल्लास और सांस्कृतिक ऊर्जा का अद्भुत वातावरण देखने को मिला, जिसने उपस्थित लोगों को भावविभोर कर दिया।

महोत्सव के प्रथम दिन पर्यावरण संरक्षण को केंद्र में रखते हुए एक विचार गोष्ठी का आयोजन भी किया गया, जिसमें देश के प्रतिष्ठित पर्यावरणविदों ने भाग लिया। वक्ताओं ने स्वर्णरेखा नदी की वर्तमान स्थिति, उसके ऐतिहासिक महत्व और भविष्य की चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि नदियाँ हमारी संस्कृति और जीवन की आधारशिला हैं, लेकिन आज मानवीय स्वार्थ के कारण इनका अस्तित्व संकट में है, जिसका खामियाजा आने वाली पीढ़ियों को भुगतना पड़ सकता है।

पर्यावरणविदों ने अपने संबोधन में यह भी स्पष्ट किया कि नदियों को प्रदूषित करना केवल एक पर्यावरणीय अपराध नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और नैतिक पतन का प्रतीक है। उन्होंने समाज से आह्वान किया कि दैनिक जीवन में छोटे-छोटे बदलाव कर नदी और प्रकृति संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभाई जाए, तभी सतत विकास की परिकल्पना साकार हो सकती है।

महोत्सव के पहले दिन पर्यावरण एवं नदी संरक्षण विषय पर स्कूली बच्चों के लिए चित्रांकन प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इसमें दस विद्यालयों के 20 छात्र-छात्राओं ने भाग लिया और अपनी कलाकृतियों के माध्यम से नदियों के महत्व, प्रदूषण की समस्या और संरक्षण के संदेश को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया। प्रतियोगिता के परिणामों की घोषणा महोत्सव के दूसरे और अंतिम दिन 14 जनवरी 2026 को की जाएगी।

संध्याकालीन सत्र में जमशेदपुर के लोकप्रिय कलाकारों द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक नृत्य, भजन और संगीत संध्या ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कलाकारों की प्रस्तुतियों ने महोत्सव को जन-जन से जोड़ते हुए आयोजन को और भी जीवंत बना दिया।

महोत्सव के दूसरे दिन, 14 जनवरी 2026 को, स्वर्णरेखा–खरकई संगम तट पर भव्य गंगा आरती का आयोजन किया जाएगा, जो इस महोत्सव का मुख्य आकर्षण होगा। इसके साथ ही विभिन्न प्रतियोगिताओं के परिणाम, सम्मान समारोह और अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे।

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