Chandil elephant attack: चांडिल रेंज में हाथियों का कहर‚ सिरुम गांव में भारी तबाही

Chandil elephant attack: सरायकेला-खरसावां जिले के चांडिल वन क्षेत्र में जंगली हाथियों का उत्पात लगातार बढ़ता जा रहा है। ताजा मामला कुकड़ू प्रखंड के सिरुम गांव का है, जहां पश्चिम बंगाल की सीमा से आए 12 जंगली हाथियों के दल ने गुरुवार देर रात भारी तबाही मचाई। अचानक हुए इस

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Chandil elephant attack: सरायकेला-खरसावां जिले के चांडिल वन क्षेत्र में जंगली हाथियों का उत्पात लगातार बढ़ता जा रहा है। ताजा मामला कुकड़ू प्रखंड के सिरुम गांव का है, जहां पश्चिम बंगाल की सीमा से आए 12 जंगली हाथियों के दल ने गुरुवार देर रात भारी तबाही मचाई। अचानक हुए इस हमले से पूरे गांव में दहशत फैल गई और ग्रामीणों को रातभर जागकर पहरा देना पड़ा।

ग्रामीणों के अनुसार, हाथियों ने किसान लेड़ा महतो के खलिहान में घुसकर करीब 10 क्विंटल धान खा लिया और बड़ी मात्रा में धान को रौंदकर बर्बाद कर दिया। घर के बाहर रखा लगभग डेढ़ क्विंटल टमाटर भी हाथियों ने पैरों तले कुचल दिया। इसके अलावा धान झाड़ने की मशीन को नुकसान पहुंचाया गया और खेतों में लगी टमाटर तथा आलू की फसलों को भी भारी क्षति पहुंची है।

हाथियों के गांव में घुसते ही ग्रामीणों ने वन विभाग को सूचना दी, लेकिन आरोप है कि क्यूआरटी (क्विक रिस्पॉन्स टीम) समय पर मौके पर नहीं पहुंच सकी। इसके बाद मजबूरी में ग्रामीणों ने मशाल, ढोल और पटाखों की मदद से हाथियों को जंगल की ओर खदेड़ने का प्रयास किया। कड़ी मशक्कत के बाद हाथियों का दल गांव से बाहर निकला।

शुक्रवार सुबह वन विभाग की टीम सिरुम गांव पहुंची और नुकसान का आकलन शुरू किया। ग्रामीणों का कहना है कि हाथियों का दल अभी भी गांव से करीब एक किलोमीटर दूर जंगल क्षेत्र में मौजूद है, जिससे किसी भी समय दोबारा हमले की आशंका बनी हुई है। इससे ग्रामीणों में भय का माहौल बना हुआ है।

इधर कुशपुतुल और गुंडा गांव में एक अकेला हाथी लगातार फसलों को नुकसान पहुंचा रहा है। वन विभाग के अनुसार, चांडिल क्षेत्र के करीब 50 से अधिक गांव जंगली हाथियों की गतिविधियों से प्रभावित हैं, जिससे मानव-वन्यजीव संघर्ष की स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही है।

वन विभाग ने बताया कि नवंबर 2024 से अब तक हाथियों से हुए नुकसान के 503 मामलों में कुल 94 लाख रुपये का मुआवजा प्रभावित ग्रामीणों के बीच वितरित किया गया है। विभाग का कहना है कि हाथियों की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है और संवेदनशील इलाकों में गश्त बढ़ाई गई है, ताकि भविष्य में नुकसान को कम किया जा सके।

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