BPL Students Future: जमशेदपुर में इंग्लिश मीडियम स्कूलों का एडमिशन महापर्व शुरू होते ही बीपीएल (Below Poverty Line) परिवारों के बच्चों का भविष्य एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गया है। शहर के कई इंग्लिश मीडियम स्कूलों ने बीपीएल कोड के तहत बच्चों के नामांकन से इनकार कर दिया है, जिससे गरीब परिवारों में चिंता और असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है।
इंग्लिश मीडियम स्कूलों का कहना है कि सरकार द्वारा बीपीएल बच्चों की शिक्षा के लिए दी जाने वाली राशि अब उपलब्ध नहीं कराई जा रही है। स्कूल प्रबंधन का दावा है कि सरकार की ओर से पत्र जारी कर यह कहा गया है कि चूंकि टाटा स्टील ने स्कूलों को जमीन निःशुल्क उपलब्ध कराई है और टाटा स्टील को यह जमीन सरकार से लीज पर मिली है, इसलिए स्कूलों को बीपीएल बच्चों को पढ़ाना होगा। हालांकि स्कूल प्रबंधन का तर्क है कि बिना वित्तीय सहायता के यह व्यवस्था व्यावहारिक नहीं है।
इस पूरे मामले पर इंग्लिश मीडियम स्कूल एसोसिएशन ने स्पष्ट कर दिया है कि वे इस फैसले के खिलाफ न्यायालय का रुख करेंगे। एसोसिएशन के अध्यक्ष नकुल कमानी ने कहा कि पूरे देश में बीपीएल बच्चों को कक्षा 6 से 12 तक पढ़ाने का प्रावधान है, लेकिन झारखंड सरकार ने इसे नर्सरी कक्षा से ही लागू कर दिया है, जो नियमों के अनुरूप नहीं है।
एसोसिएशन का कहना है कि बीपीएल बच्चों की पढ़ाई को लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है और जब तक कानूनी रूप से समाधान नहीं निकलता, तब तक स्कूलों पर दबाव बनाना उचित नहीं है। इस मुद्दे को लेकर जल्द ही मामला न्यायालय में जाएगा, जहां नियमों और दायित्वों की व्याख्या की जाएगी।
फिलहाल इस विवाद का सबसे बड़ा असर बीपीएल परिवारों के बच्चों पर पड़ता दिखाई दे रहा है। अगर स्थिति नहीं सुधरी, तो जाहिर तौर पर गरीब परिवारों के बच्चे इंग्लिश मीडियम स्कूलों में पढ़ने से वंचित रह सकते हैं। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि सरकार, स्कूल प्रबंधन और न्यायालय इस मुद्दे का क्या समाधान निकालते हैं।


