Ambulance System Fails: सरायकेला जिले में स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर किए जा रहे सरकारी दावों की हकीकत एक बार फिर सामने आ गई है। इमरजेंसी सेवा की रीढ़ मानी जाने वाली 108 एंबुलेंस व्यवस्था की बदहाली ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिला मुख्यालय प्रखंड क्षेत्र में शुक्रवार को ऐसा नजारा देखने को मिला, जिसने पूरे सिस्टम की पोल खोल दी।
सूत्रों के अनुसार शुक्रवार सुबह एक 108 एंबुलेंस मरीज लाने के लिए कालाडूंगरी की ओर रवाना हुई थी। मरीज को एंबुलेंस में बैठाने के बाद जब वाहन स्टार्ट करने की कोशिश की गई, तो वह अचानक खराब हो गया। इमरजेंसी स्थिति में एंबुलेंस के जवाब दे देने से मौके पर अफरा-तफरी मच गई और मरीज के परिजन घबरा गए।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए तत्काल दूसरी 108 एंबुलेंस को बुलाया गया। दूसरा एंबुलेंस मौके पर पहुंचा और मरीज को लेकर आगे बढ़ा, लेकिन हैरानी की बात यह रही कि उसी एंबुलेंस को खराब पड़े वाहन को खींचते हुए अस्पताल तक ले जाना पड़ा। यह दृश्य जिले की आपातकालीन स्वास्थ्य सेवा की जमीनी सच्चाई को उजागर करता नजर आया।
जिस 108 एंबुलेंस सेवा पर इमरजेंसी में मरीजों की जान बचाने का सबसे अधिक भरोसा किया जाता है, वही सेवा खुद ‘बीमार’ दिखी। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर एंबुलेंस समय पर और सही हालत में न पहुंचे, तो गंभीर मरीज की जान पर सीधा खतरा मंडराने लगता है।
स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार और स्वास्थ्य विभाग मंचों से बेहतर चिकित्सा व्यवस्था के दावे तो करते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट है। स्वास्थ्य मंत्री द्वारा झारखंड में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं की बात की जाती है, लेकिन जब एंबुलेंस जैसी बुनियादी इमरजेंसी सेवा ही जवाब दे जाए, तो मरीजों की सुरक्षा पर सवाल उठना स्वाभाविक है। यह घटना न सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाती है, बल्कि जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की गंभीर स्थिति पर भी सोचने को मजबूर करती है।


