Ghatshila By-Election: हेमंत सोरेन ने चंपाई और उनके पुत्र को निशाना बनाया‚ तीखे तेवर में रैलियों को रौशन किया

Ghatshila By-Election: घाटशिला विधानसभा उपचुनाव की तिथि नजदीक आते ही राजनीतिक बयानबाज़ी में तेज़ी आ गई है। आज हेमंत सोरेन) नेता हेमंत सोरेन ने घाटशिला में चुनावी रैली के दौरान घाटशिला)भाजपा प्रत्याशी चंपई सोरेन और उनके पुत्र पर तीखा हमला बोला, जिससे क्षेत्र का चुनावी माहौल और गरम हो गया।

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Ghatshila By-Election: घाटशिला विधानसभा उपचुनाव की तिथि नजदीक आते ही राजनीतिक बयानबाज़ी में तेज़ी आ गई है। आज हेमंत सोरेन) नेता हेमंत सोरेन ने घाटशिला में चुनावी रैली के दौरान घाटशिला)भाजपा प्रत्याशी चंपई सोरेन और उनके पुत्र पर तीखा हमला बोला, जिससे क्षेत्र का चुनावी माहौल और गरम हो गया। आज उनका रुख स्पष्ट रूप से विपक्षी दलों और स्थानीय प्रतिद्वंद्वियों को कटाक्ष करते हुए देखने को मिला।

हेमंत सोरेन ने रैली में कहा कि भाजपा द्वारा मैदान में भेजे गए प्रत्याशी “ऐसे लोग हैं जो हमारे आंदोलन को कमजोर करते हैं।” (आरोप) उन्होंने प्रतिद्वंद्वी का उपमा देते हुए कहा कि कुछ लोग अपनी राजनीतिक पहचान और फायदे के लिए मौके देखकर गायब हो जाते हैं। सोरेन ने अपने भाषण में उन लोगों का ज़िक्र किया जिनके कारण राज्य को अलग राज्य बनाने में दशकों लग गए और उन आंदोलनकारी बुजुर्गों का स्मरण किया जिनकी कुर्बानी से यह लड़ाई आगे बढ़ी। भावनात्मक और राजनीतिक स्वाभिमान को भड़काना)

भाषण के दौरान हेमंत सोरेन ने जनता को भरोसा दिलाया कि उनकी पीढ़ी अब और मजबूत है और वह “मुँहतोड़” जवाब देने की क्षमता रखती है। उन्होंने कहा कि जनता ही सर्वोच्च अदालत है और जब लोगों ने किसी पार्टी को निकाल देने का मन बना लिया तो उसके सामने कोई अदालत नहीं टिकती। (How: भावनात्मक अपील और जनहित का वादा) यह शैली मतदाताओं को सक्रिय करने और घर-घर जाकर समर्थन जुटाने का स्पष्ट प्रयास दिखाती है।

सोमेश बाबू के समर्थन में उन्होंने स्पष्ट अपील की और कहा कि घाटशिला के विकास के सपनों को पूरा करने के लिये उन्हें मौका दिया जाना चाहिए। सोरेन ने दावा किया कि सोमेश जैसी मजबूती और प्रतिबद्धता वाला कोई और उम्मीदवार क्षेत्र के विकास की जिम्मेदारी बेहतर ढंग से नहीं निभा सकता। समर्थन का कारण — विकास और भरोसा)

हेमंत सोरेन ने जनता से सजग रहने का आग्रह किया और स्पष्ट किया कि चुनावी माहौल में अफवाह फैलाने, डराने-धमकाने व खरीद-फरोख्त जैसी गतिविधियाँ बढ़ेंगी; उन्होंने लोगों को इन तत्वों की पहचान करने और उनसे बचने की बात कही। चुनावी अनुशासन और जागरूकता की अपील) उनका संदेश ये भी था कि चुनावी समय पर जनभागीदारी और चौकसी ही अंतिम निर्णायक होगी।

घाटशिला में आज के बयान ने राजनीतिक ध्रुवीकरण और चुनावी टकराव को और तेज कर दिया है। सत्ता-विरोधी रुख, स्थानीय मुद्दों पर तीखी भाषा और उम्मीदवारों के व्यक्तिगत और पारिवारिक पहलुओं को लेकर हो रही टिप्पणी से क्षेत्र में चुनावी गर्माहट बरकरार रहने वाली दिखती है। आने वाले दिनों में दोनों पक्षों की सक्रियता बढ़ने की संभावना है और यह रैली उसी रणनीति का हिस्सा मानी जाएगी जिसमें भीड़ जुटाकर और मुद्दे उछालकर मतदाताओं पर प्रभाव डालने की कोशिश की जा रही है।

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