NIT Convocation Controversy: सरायकेला जिले के आदित्यपुर स्थित राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) जमशेदपुर का 15वां दीक्षांत समारोह उस समय चर्चा में आ गया, जब कार्यक्रम में शामिल भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अपने संबोधन के दौरान मंच से ऐसी टिप्पणी की, जिसने पूरे सभागार को कुछ क्षणों के लिए असहज कर दिया। राष्ट्रपति की इस टिप्पणी के बाद समारोह का माहौल अचानक बदलता नजर आया।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अपने संबोधन में कहा कि जिन विद्यार्थियों को मेडल और डिग्रियां प्रदान की जा रही हैं, उन्हें देखकर अन्य छात्र-छात्राओं के चेहरों पर अपेक्षित खुशी नजर नहीं आ रही है। उन्होंने मंच से यह भी कहा कि ऐसा प्रतीत हो रहा है मानो तालियां बजाने से मना किया गया हो या फिर विद्यार्थियों को भूख लग गई हो। राष्ट्रपति की इस टिप्पणी को कई लोग व्यंग्य के रूप में भी देख रहे हैं।
राष्ट्रपति ने आगे कहा कि “देने वाला ही पाता है। आज अगर आप दूसरों के लिए तालियां बजाएंगे, तो कल आपके लिए भी तालियां बजेंगी।” राष्ट्रपति के इस कथन ने समारोह में मौजूद छात्र-छात्राओं को सीधे तौर पर संबोधित किया और माहौल को सकारात्मक दिशा देने का प्रयास किया।
राष्ट्रपति के इस संदेश के तुरंत बाद पूरे सभागार में तालियों की गड़गड़ाहट सुनाई दी। जो माहौल कुछ देर पहले तक शांत और औपचारिक नजर आ रहा था, वह अचानक उत्साह से भर उठा। यह दृश्य समारोह के सबसे चर्चित क्षणों में शामिल हो गया।
हालांकि राष्ट्रपति की टिप्पणी के बाद तालियों से सभागार गूंज उठा, लेकिन दीक्षांत समारोह की व्यवस्थाओं को लेकर कुछ सवाल भी उठने लगे हैं। जानकारों का मानना है कि कार्यक्रम के संचालन को लेकर कुछ असंतोष या असहजता रही होगी, जिसे राष्ट्रपति ने मंच से महसूस कर सार्वजनिक रूप से सामने रख दिया। माना जा रहा है कि संस्थान प्रबंधन इन चर्चाओं को दबाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन राष्ट्रपति की टिप्पणी के बाद यह मुद्दा सार्वजनिक विमर्श का हिस्सा बन गया है।


