Saraswati Puja Preparations: जमशेदपुर में विद्या की देवी मां सरस्वती की पूजा को लेकर तैयारियां ज़ोरों पर हैं। आगामी 23 जनवरी को आयोजित होने वाली सरस्वती पूजा से पहले शहर भर में मूर्तिकार माता की प्रतिमाओं को अंतिम रूप देने में जुटे हुए हैं। पूजा समितियों और पंडालों तक समय पर मूर्तियां पहुंचाने के लिए कारीगर दिन-रात मेहनत कर रहे हैं।
मूर्तिकारों के अनुसार, सरस्वती पूजा के लिए मूर्तियों का निर्माण कार्य करीब ढाई महीने पहले ही शुरू कर दिया गया था। इसका उद्देश्य यह था कि पूजा से पहले सभी ऑर्डर समय पर पूरे किए जा सकें। इस दौरान पारंपरिक विधियों से मिट्टी की प्रतिमाओं को आकार देकर उन्हें सजाया जा रहा है।
इस वर्ष मूर्ति निर्माण की लागत में बढ़ोतरी मूर्तिकारों के लिए बड़ी चुनौती बनकर सामने आई है। मिट्टी, रंग, बांस, पुआल और अन्य आवश्यक सामग्रियों की कीमतों में इजाफा हुआ है, जिसका सीधा असर मूर्तियों के दाम पर पड़ा है। मूर्तिकारों का कहना है कि लागत बढ़ने के बावजूद उन्होंने गुणवत्ता और शिल्प में कोई समझौता नहीं किया है।
मूर्ति निर्माण से जुड़े कारीगरों ने इस दौरान अपनी चिंता भी जाहिर की। उनका कहना है कि नई पीढ़ी इस पारंपरिक कला से धीरे-धीरे दूरी बना रही है। मूर्तिकला सीखने में समय, धैर्य और मेहनत की जरूरत होती है, लेकिन युवाओं की घटती रुचि के कारण इस पेशे में नए लोगों का आना कम हो गया है।
इन तमाम चुनौतियों के बावजूद मूर्तिकार पूरी श्रद्धा और समर्पण के साथ मां सरस्वती की प्रतिमाओं को अंतिम रूप देने में जुटे हुए हैं। उनका प्रयास है कि भक्तों की आस्था से जुड़ा यह पर्व भव्य और विधिवत तरीके से मनाया जा सके।
इस संबंध में मूर्तिकार तपन पाल ने बताया कि बढ़ती लागत और घटती कारीगर संख्या के बावजूद वे समय पर बेहतर प्रतिमाएं तैयार करने का पूरा प्रयास कर रहे हैं।


