Dhanbad Terror Attack: 3 जनवरी 1991 की सुबह धनबाद के लिए सामान्य नहीं थी। शहर की शांति उस समय भंग हो गई जब AK-47 की तड़तड़ाहट ने पूरे इलाके को दहला दिया। पंजाब से आए खालिस्तानी आतंकियों ने हीरापुर स्थित बैंक ऑफ इंडिया शाखा को निशाना बनाते हुए लूट की योजना बनाई थी। सूचना मिलते ही तत्कालीन पुलिस अधीक्षक रणधीर प्रसाद वर्मा बिना किसी अतिरिक्त सुरक्षा के अकेले ही मौके के लिए निकल पड़े।
बैंक परिसर पहुंचकर रणधीर वर्मा सीधे सीढ़ियां चढ़ते हुए आतंकियों के सामने जा खड़े हुए और उन्हें आत्मसमर्पण की चेतावनी दी। जवाब में आतंकियों ने AK-47 से अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। इस हमले में रणधीर वर्मा को सात गोलियां लगीं, लेकिन गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और अपनी रिवाल्वर से जवाबी फायरिंग करते हुए एक आतंकी को मौके पर ही ढेर कर दिया।
रणधीर वर्मा की इस अदम्य साहसिक कार्रवाई ने आतंकियों की योजना को विफल कर दिया और बैंक में मौजूद आम नागरिकों की जान बच गई। इसी संघर्ष के दौरान उन्होंने वीरगति प्राप्त की। उस दिन धनबाद ने सिर्फ एक पुलिस अधिकारी नहीं, बल्कि आतंक के खिलाफ खड़े एक सच्चे योद्धा को खो दिया।
1952 में बिहार के सुपौल जिले में जन्मे रणधीर वर्मा अपने करियर के दौरान बेगूसराय जैसे अपराधग्रस्त इलाकों में माफिया कामदेव सिंह जैसे कुख्यात अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के लिए जाने जाते थे। आतंकवाद और संगठित अपराध के खिलाफ उनकी निर्भीक छवि ने उन्हें पुलिस बल के लिए प्रेरणा बना दिया।
उनकी शहादत के बाद भारत सरकार ने रणधीर वर्मा को मरणोपरांत देश के सर्वोच्च शांतिकालीन वीरता पुरस्कार अशोक चक्र से सम्मानित किया। उनके सम्मान में डाक टिकट भी जारी किया गया। उनकी पत्नी प्रो. रीता वर्मा चार बार भाजपा सांसद रहीं और अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में केंद्रीय मंत्री के रूप में देश की सेवा कर चुकी हैं।
रणधीर वर्मा के 35वें शहादत दिवस पर धनबाद के रणधीर वर्मा चौक पर संगीतमय श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में पद्मश्री से सम्मानित चिकित्सक, जिले के SSP प्रभात कुमार, उपायुक्त आदित्य रंजन सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। हर वर्ष की परंपरा के अनुसार, शहीद की पत्नी प्रो. रीता वर्मा की उपस्थिति में श्रद्धासुमन अर्पित किए गए।
आज जब पुलिस सेवा में नेतृत्व और जोखिम उठाने की भावना पर सवाल उठते हैं, रणधीर वर्मा का बलिदान यह याद दिलाता है कि सच्चा नेतृत्व आगे रहकर ही उदाहरण बनाता है। धनबाद आज भी उनके नाम से गूंजता है और हर पुलिसकर्मी के लिए उनकी शहादत एक अमिट मिसाल बनी हुई है।सलाम शहीद रणधीर प्रसाद वर्मा को।


