Giridih News: 90 वर्षीय शशिभूषण तिवारी की अंतिम यात्रा में दिखा अनोखा दृश्य‚ डीजे की धुनों पर नाचते दिखे परिजन

Giridih News: गिरिडीह, संवाददाता। पचंबा थाना क्षेत्र के तिवारीडीह, हांडा डीह में 90 वर्षीय शशिभूषण तिवारी के अंतिम संस्कार के दौरान एक ऐसा दृश्य सामने आया, जिसने पूरे इलाके में चर्चा का माहौल बना दिया। आमतौर पर ग़म और सन्नाटे से भरी रहने वाली अंतिम यात्रा इस बार खुशियों और

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Giridih News: गिरिडीह, संवाददाता। पचंबा थाना क्षेत्र के तिवारीडीह, हांडा डीह में 90 वर्षीय शशिभूषण तिवारी के अंतिम संस्कार के दौरान एक ऐसा दृश्य सामने आया, जिसने पूरे इलाके में चर्चा का माहौल बना दिया। आमतौर पर ग़म और सन्नाटे से भरी रहने वाली अंतिम यात्रा इस बार खुशियों और संगीत के साथ निकली, जहाँ परिजन और स्थानीय लोग डीजे की धुनों पर नाचते दिखाई दिए।

परिजनों ने बताया कि शशिभूषण तिवारी अपने जीवनकाल में बेहद हँसमुख, मिलनसार और सकारात्मक सोच वाले व्यक्ति थे। उन्हें हमेशा लोगों के बीच आनंद और मुस्कुराहट बांटने की आदत थी। इसी स्वभाव को सम्मान देने के लिए परिवार ने निर्णय लिया कि विदाई पारंपरिक शोक के बजाय उत्सव जैसी भावना के साथ की जाएगी, ताकि उनके जीवन के आनंदपूर्ण पहलू को याद किया जा सके।

जैसे ही अंतिम यात्रा शुरू हुई, डीजे की धुनों ने माहौल को पूरी तरह अलग बना दिया। परिजन नाचते-गाते आगे बढ़े और रास्ते में स्थानीय लोग भी इस अनोखे दृश्य को देखने के लिए जुटते चले गए। कई लोगों ने बताया कि यह पहली बार था जब किसी अंतिम संस्कार में इतनी खुशी और सम्मान का मिश्रण देखने को मिला।

यह घटना क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है। ग्रामीणों ने कहा कि परिवार ने जो संदेश दिया है, वह भावनात्मक और प्रेरणादायक है—विदाई भी सकारात्मकता के साथ दी जा सकती है, यदि उद्देश्य व्यक्ति के जीवन का जश्न मनाना हो।परिजनों का कहना है कि यह आयोजन दुख प्रकट करने के लिए नहीं, बल्कि शशिभूषण तिवारी के जीवन, उनके स्वभाव और उनकी प्रसन्नता की विरासत को सम्मान देने के लिए किया गया।

लोगों का मानना है कि यह विदाई समाज को यह सोचने पर मजबूर करती है कि अंतिम संस्कार केवल शोक का अवसर नहीं, बल्कि जीवन के प्रति सम्मान का प्रतीक भी हो सकता है। इस अनोखे आयोजन ने क्षेत्र में एक नई चर्चा और दृष्टिकोण को जन्म दिया है।

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